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पटना के 10 सर्कुलर रोड आवास विवाद से गरमाई बिहार की सियासत, राबड़ी देवी को खाली करने का नोटिस

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पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में तनाव बढ़ गया है।

पटना/आलम की खबर: बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। 10 सर्कुलर रोड स्थित चर्चित बंगले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस को जन्म दे दिया है।

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को इस आवास को खाली करने का औपचारिक निर्देश दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह बंगला अब किसी अन्य मंत्री को आवंटित किया गया है, जिसके बाद से इसे लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। नोटिस मिलने के बाद से राजनीतिक गलियारों में लगातार बयानबाजी का दौर जारी है।

यह आवास पिछले करीब दो दशकों से राबड़ी देवी और उनके परिवार का प्रमुख ठिकाना रहा है। वर्ष 2006 के बाद से यह स्थान न सिर्फ निवास बल्कि राजनीतिक गतिविधियों का भी केंद्र बन गया था। यहां से राजद की कई अहम रणनीतियां तय होती रही हैं, जिसके कारण यह बंगला राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अधिकारियों की टीम द्वारा आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा गया और 15 दिनों के भीतर बंगला खाली करने का निर्देश दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से ही मामला तेजी से राजनीतिक रंग ले चुका है और विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

जेडीयू की ओर से इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि सरकारी सुविधाओं का उपयोग नियमों के अनुसार होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को पद से हटने के बाद अनावश्यक रूप से सरकारी आवास पर अधिकार नहीं रखना चाहिए। वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और बदले की भावना से जोड़कर देख रहा है।

राजद का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और इसे चुनावी माहौल में दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस तरह के फैसलों का उद्देश्य केवल राजनीतिक छवि को प्रभावित करना है।

10 सर्कुलर रोड का यह बंगला बिहार की राजनीति में लंबे समय से एक प्रतीकात्मक स्थान रखता है। इसे अक्सर राजद के शक्ति केंद्र के रूप में देखा जाता रहा है, जहां से महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लिए जाते रहे हैं। इसलिए इस आवास से जुड़ा कोई भी निर्णय सीधे तौर पर राज्य की राजनीति पर असर डालता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे ऐसे मुद्दे और अधिक गरमाते जा रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है और आवास आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक है। अब देखना यह होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यह आवास खाली होता है या फिर यह विवाद और गहराता है।

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